दिन प्रति दिन बेरोजगारी दर बढ़ती जा रही है। लोगों की नौकरियां खत्म होती जा रही है और महँगाई चरम सीमा पर पहुंच गई है।
लेकिन सत्ता मे रहने वाले लोगों पर इसका कोई फर्क़ नहीं पड़ रहा है सत्ताधारी अपनी सत्ता का डर दिखाकर लोगों की आवाज दबा रहे हैं। धर्म और जाति के आधार पर लोगों को बांटने का काम कर रहे हैं ऐसा कोई विभाग नहीं बचा है जहां रिश्वतखोरी ना बड़ी हो, पहले से दस गुना रिश्वतखोरी बढ़ चुकी है। जो लोग इसके खिलाफ आवाज उठाते है सत्ताधारी इनकी आवाज को दबा देते हैं और अपनी सत्ता का डर दिखाते हैं।
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